What is thyroid and why this disease occurs? /thyroid gland
The thyroid is an organ situated toward the front of the neck that produces chemicals fundamental for managing digestion, development, and improvement. It assumes a critical part in keeping up with the body's energy balance.
Thyroid infection can happen because of different reasons, including:
Hypothyroidism: This happens when the thyroid organ doesn't create an adequate number of thyroid chemicals. It tends to be brought about via immune system illnesses (like Hashimoto's thyroiditis), radiation treatment, certain drugs, iodine inadequacy, or issues with the pituitary organ or nerve center.
Hyperthyroidism: This condition emerges when the thyroid organ creates an abundance of thyroid chemicals. It is ordinarily brought about by an immune system problem known as Graves' illness. Different causes might incorporate thyroid knobs, aggravation of the thyroid (thyroiditis), or certain prescriptions.
Thyroid knobs: These are irregularities or developments that foster inside the thyroid organ. Most knobs are harmless (noncancerous), however some might be destructive. The specific reason for thyroid knobs is many times obscure, however factors like iodine inadequacy, radiation openness, or hereditary variables might contribute.
Thyroid disease: It is the uncontrolled development of unusual cells inside the thyroid organ. The specific reason for thyroid disease isn't generally clear, however certain elements like radiation openness, family ancestry, and certain hereditary circumstances can expand the gamble.
Immune system problems, hereditary variables, hormonal irregular characteristics, natural elements, and certain meds can add to the advancement of thyroid infections. It is vital to talk with a medical services proficient in the event that you suspect a thyroid condition, as they can analyze the particular sickness and give proper therapy.
थायराइड क्या है..? (thyroid gland)
जानिये और समझिये...
थायराइड शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्लैंड या अन्तःस्रावी ग्रन्थि है जो तितली के आकार का होता है एवं गले में स्थित है।
इससे थायराइड हार्मोन का स्राव होता है जो हमारे मेटाबालिज्म की दर को संतुलित करता है।
थायराइड ग्लैंड्स शरीर से आयोडीन लेकर इन्हें बनाते हैं जो हार्मोन मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए जरूरी होती हैं।
थायराइड हार्मोन का स्राव असंतुलित होने से शरीर की समस्त भीतरी
कार्य प्रणालियां अव्यवस्थित हो जाती हैं।
थायराइड दो प्रकार का होता है..
पहला..
हाइपो-थायराइड
एवं दूसरा
हायपर-थायराइड।
हाइपो-थायराइड..
इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता जिससे शरीर में आवश्यकतानुसार टी-3 व टी-4 हार्मोन नहीं पहुंच पाता है।
✔️ इस स्थिति में वजन में
अचानक वृद्धि हो जाती है।
✔️ सुस्ती महसूस होती है।
✔️ रोजाना की गतिविधियों में रूचि कम हो जाती
है।
✔️ शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है।
✔️ पैरों में सूजन व ऐंठन की शिकायत होती है।
✔️ चलने में दिक्कत होती है।
ठंड बहुत महसूस होती है।
✔️ कब्ज होने लगती है।
✔️ चेहरा व आंखें सूज जाती हैं।
✔️ मासिक चक्र अनियमित हो जाता है।
✔️ त्वचा सूखी व बाल बेजान होकर झड़ने लगते हैं।
✔️ हमेशा डिप्रेशन रहने लगता है।
✔️ रोगी तनाव व अवसाद से घिर जाते हैं और
✔️ बात-बात में भावुक हो जाते हैं।
✔️ आवाज रूखी व भारी हो जाती है।
यह रोग 30 से 60 वर्ष की महिलाओं को होता है।
हायपरथायराइड..
इसमें थायराइड ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है और टी-3, टी-4 हार्मोन अधिक मात्रा में
निकलकर रक्त में घुलनशील हो जाता है।
✔️ इस स्थिति में वजन अचानक कम हो जाता है।
✔️ भूख में वृद्धि होती है।
✔️ रोगी गर्मी सहन नहीं कर पाते।
✔️ अत्यधिक पसीना आता है।
✔️ मांसपेशियां कमजोर हो जाती है।
✔️ हाथ कांपते हैं और आंखें उनींदी रहती हैं।
✔️ निराशा हावी हो जाती है।
✔️ धड़कन बढ़ जाती है।
✔️ नींद नहीं आती।
✔️ मासिक रक्तस्राव ज्यादा एवं अनियमित हो जाता
है।
✔️ गर्भपात के मामले सामने आते हैं।
हायपर थायराइड बीस साल की महिलाओं को ज्यादा होता है।
थाइरोइड से होने वाले नुकसान..
महिलाएं थायराइड की सबसे ज्यादा शिकार होती हैं।
स्थिति यह है कि हर दस थायराइड मरीजों में से आठ महिलाएं ही होती हैं।
उनका वेट बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी है।
इससे.....
✔️ तनाव,
✔️ अवसाद,
✔️ नींद ठीक से न आना,
✔️ कोलेस्ट्रॉल,
✔️ आस्टियोपोरोसिस,
✔️ बांझपन,
✔️ पीरियड का टाइम पर न आना,
✔️ दिल की धड़कन बढ़ना जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
जांच व उपचार..
थायराइड के दोनों प्रकार में ब्लड टैस्ट किया जाता है।
ब्लड में टी-3, टी-4 एवं टी.एस.एच. लेवल में
सक्रिय हार्मोंस का लेवल जांचा जाता है।
टेस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार डाक्टर ट्रीटमेंट करते हैं।
अधिकतर रोगियों को उम्र भर दवा खानी पड़ती है,
किंतु पहले चरण में उपचार करा लेने से ज्यादा परेशानियां नहीं आतीं।
मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।
ऐसी चीजें न खाएं जिससे थायराइड से पैदा होने वाली परेशानियां और बढ़ जाएं।
इन चीजों से जरा परहेज करें...
1. आयोडीन वाला खाना :
चूंकि थायराइड ग्लैंड्स
हमारे शरीर से आयोडीन लेकर थायराइड हार्मोन पैदा करते हैं, इसलिए हाइपोथायराइड है अतः
आयोडीन की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों से
जीवनभर दूरी बनाए रखें।
सी फूड और आयोडीन वाले
नमक को अवॉयड करें।
विशेष थाइरोइड के किसी भी प्रकार में सबसे उचित और उत्तम सेंधा नमक होगा। ज्यादा जानकारी गूगल से प्राप्त करें।
2. कैफीन :
कैफीन वैसे तो सीधे थाइराइड नहीं बढ़ाता, लेकिन यह उन परेशानियों को बढ़ा देता है, जो थायराइड की वजह से पैदा होती हैं, जैसे बेचैनी और नींद में खलल।
3. रेड मीट :
रेड मीट में कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेडेट फैट बहुत
होता है।
इससे वजन तेजी से बढ़ता है।
थाइराइड वालों का वजन तो वैसे ही बहुत तेजी से बढ़ता है।
इसलिए इसे अवॉयड करें इसके अलावा रेड मीट खाने से थाइराइड
वालों को बदन में जलन की शिकायत होने लगती है।
4. एल्कोहल:
एल्कोहल यानी शराब़, बीयर वगैरा शरीर में एनर्जी के लेवल को प्रभावित करता है।
इससे थाइराइड की समस्या वाले लोगों की नींद में दिक्कत की शिकायत और बढ़ जाती है।
इसके अलावा इससे ओस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है।
5. वनस्पति घी:
वनस्पति घी को हाइड्रोजन में से गुजार कर बनाया जाता है।
यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल को खत्म करते हैं और बुरे को बढ़ावा देते हैं। बढ़े थाइराइड से जो परेशानियां पैदा होती हैं, ये उन्हें और बढ़ा देते हैं।
ध्यान रहे इस घी का इस्तेमाल खाने-पीने की दुकानों में जमकर होता है। इसलिए बाहर का फ्राइड खाना न ही खाएं।
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